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तिलिस्म चुनारगढ़ किला...मिर्जापुर

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  देवकीनंदन खत्री की  तिलिस्म उपन्यास चंद्रकांता का मुख्य केंद्र चुनारगढ़ का किला के बारे में आप  सुने होगें।गंगा नदी के किनारे   मिर्जापुर जिला के दक्षिण में स्थित किला की अपनी अलग दास्तान है।चुनारगढ़ का किला के बारे में तिलिस्म और रहस्यमयी कहानियों खूब सुनने को मिलती है। किला को किसने और कब बनवाया इसका तो कोई ठोस प्रमाण अभी तक उपलब्ध नही है परन्तु किला निर्माण को लेकर राजा विक्रमादित्य का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।किले का सबसे खूबसूरत हिस्सा 52 खंभों पर बना सोनवा मंडप है।किले में एक गहरी बाउली है जिसकी सीढिया पानी के अंदर जाती हैं।बंद तहखाने और अनेक गुप्त द्वार के कारण किले का रहस्य आज भी बरकरार हैं।वर्तमान समय में चुनारगढ़ किले का एक हिस्सा पुलिस ट्रेनिग सेंटर के रूप तब्दील हो चुकी हैं ।किले से गंगा नदी का विहंगम दृश्य देखा जा सकता हैं।

राजदरी -देवदरी जल प्रपात ..

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विंध्य पर्वतीय वनक्षेत्र वाले राजदरी इलाके में वर्षा ऋतु में नैसर्गिक सौंदर्य  चरम पर रहती है। प्रकृति की छांव में वक्त बिताना पर्यटकों को खूब भाता है।  राजदरी, देवदरी और लतीफशाह और चन्द्रप्रभा डैम  घूमने के लिये बेहद उम्दा पर्यटन स्थल हैं।  राजदरी देवदरी और चन्द्रप्रभा वन्य अभ्यारण्य उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में  है । वाराणसी से चंदौली 50 कम दूर  है। राजदरी स्थानीय पर्यटकों की बड़ी तादाद सैर सपाटे और पिकनिक के लिये आती है। रविवार और छुट्टियों के दिन यहां पर्यटकों का मेला सा लगा रहता है।  

भीमबेटका रॉक Bhimbetka rock shelters विश्व धरोहर

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भोपाल शहर से बाहर पठारी रास्ते से गुजरते रायसेन जिले में स्थित  भीमबेटका गुफाएं पहुँचे सकते है.दस से बारह हजार साल अति प्राचीन गुफाएं प्रागैतिहासिक काल की 275 भित्तिचित्र को आप देख सकते हैं इसके अलावा 600 शैलाश्रय है.विंध्याचलपर्वत से घिरी भोपाल से 45 km दूर रायसेन जिले में नवपाषाण काल की गुफाओं को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित कर रखा हैं.गुफाओं में गेरुआ ,लाल सफेद खनिज रंगों से हाथी,जंगली सूअर,बाघ और शिकार के शैल चित्रों को आदिमानव द्वारा उकेरी गई है.