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ताड़केश्वर महादेव मंदिर,पौड़ी -गढ़वाल Tarkeshwar Mahadev Temple

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  तारकेश्वर महादेव मंदिर लगभग 1500 वर्ष पुराने शिव मंदिरों में से एक है।भगवान शिव को समर्पित मंदिर ‘गढ़वाल राइफल’ के मुख्यालय लांसडाउन से यह मंदिर 36 और कोटद्वार से 70 किलोमीटर दूर है। संकरी पहाड़ी मार्गो से गुजरते हुए देवदार और पाइन के घने जंगलों का अद्भुत नजारा है। देवदार के पेड़ों से घिरा यह स्थान उन लोगों के लिए  है, जो प्रकृति में सौंदर्य  और शांति की तलाश करते हैं। शिवरात्रि के दौरान विशेष पूजा की जाती है।

कोटद्वार Kotdwar #देवभूमि उत्तराखंड त्तराखंड

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  गढ़वाल का प्रवेशद्वार कोटद्वार खोह नदी के तट पर बसा हैं .पर्यटक हिमालय के रेंज की तरफ कोटद्वार से होकर ही बढ़ते है.पौड़ी गढ़वाल जिले का यह शहर अपने आप में अनूठा है.दिल्ली से 200 किमी दूर स्थित कोटद्वार में के मनोरम पहाड़ियों पर अति प्राचीन और दुर्लभ कण्वा आश्रम है.तीन तरफ पहाडियों से घिरा और मालनी नदी के तट के किनारे कण्वा आश्रम राजा दुष्यंत और शकुन्तला के पुत्र राजा भरत की जन्मस्थली के रूप में जाना जाता है.कोटद्वार में स्थित मालिनी के तट पर "कण्वआश्रम" या कण्व के आश्रम” का गौरवमय इतिहास है। कण्वाश्रम कण्व ऋषि का आश्रम है । हस्तिनापुर के राजा दुष्यन्त तथा शकुन्तला के गन्धर्व विवाह के पश्चात "भरत" का जन्म हुआ था।कालान्तर में शकुन्तला पुत्र भरत के नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा। ।मालिनि नदी के तट के दोनो तरफ घनघोर जंगलो के बीच मे स्तिथ कण्वाश्रम मे इस बहादुर बालक ने अपना बचपन जंगली जानवर तथा शेर के बच्चों से खेलते हुए बिताया। बडे होकर इस बालक को चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम से जाना गया जिसने  विशाल भूखण्ड पर कई वर्षो तक राज्य किया। समय की विभीषिका ने कण्वआश्रम के भौतिक ...

गांधी आश्रम ,साबरमती

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